URL क्या है और कैसे काम करता है?

आपने अपने ब्राउज़र में कई बार URL टाइप किया होगा, या फिर किसी वेबसाइट के लिंक को कॉपी या शेयर किया होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि URL क्या है और कैसे काम करता …

URL kya hai, URL क्या है

आपने अपने ब्राउज़र में कई बार URL टाइप किया होगा, या फिर किसी वेबसाइट के लिंक को कॉपी या शेयर किया होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि URL क्या है और कैसे काम करता है? इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको URL के बारे में सब कुछ बताएंगे।

URL का मतलब क्या है?

URL का मतलब है Uniform Resource Locator. यह एक विशिष्ट वेब पेज या अन्य ऑनलाइन संसाधन का पता बताता है। URL में वेब पेज का नाम, डोमेन नाम, प्रोटोकॉल, पोर्ट नंबर, पथ, पैरामीटर, एंकर और क्वेरी स्ट्रिंग जैसे विभिन्न घटक होते हैं।

उदाहरण के लिए, इस URL को देखें:

https://www.hinditechdaily.com/blog/url-kya-hai?lang=hi#introduction

इस URL में निम्नलिखित घटक हैं:

  • https:// – यह प्रोटोकॉल है, जो वेब पेज को कैसे एक्सेस करना है, यह बताता है। HTTPS का मतलब है Hypertext Transfer Protocol Secure, जो एक सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड प्रोटोकॉल है।
  • www.hinditechdaily.com – यह डोमेन नाम है, जो वेब पेज का स्थान बताता है। डोमेन नाम में एक या अधिक सबडोमेन भी हो सकते हैं, जैसे www
  • /blog/url-kya-hai – यह पथ है, जो वेब पेज का नाम और वर्गीकरण बताता है। पथ में एक या अधिक स्लैश से अलग किए गए फ़ोल्डर या फ़ाइल नाम हो सकते हैं।
  • ?lang=hi – यह क्वेरी स्ट्रिंग है, जो वेब पेज को अतिरिक्त जानकारी या विकल्प प्रदान करता है। क्वेरी स्ट्रिंग में एक या अधिक पैरामीटर हो सकते हैं, जो ? से शुरू होते हैं और & से अलग किए जाते हैं। प्रत्येक पैरामीटर में एक नाम और एक मान होता है, जो = से जुड़ा होता है। इस उदाहरण में, पैरामीटर का नाम है lang और मान है hi, जो भाषा को हिंदी में सेट करता है।
  • #introduction – यह एंकर है, जो वेब पेज के एक विशिष्ट भाग को निशान लगाता है। एंकर को # से शुरू किया जाता है और वेब पेज में एक आईडी या नाम से मेल खाता है। इस उदाहरण में, एंकर introduction है, जो वेब पेज के परिचय भाग को दर्शाता है।

URL कैसे काम करता है?

जब आप अपने ब्राउज़र में कोई URL टाइप करते हैं, तो आपका ब्राउज़र उस URL को विभिन्न घटकों में विभाजित करता है और उन्हें समझने की कोशिश करता है। फिर आपका ब्राउज़र उस URL के अनुसार वेब पेज को लोड करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाता है:

  • पहले, आपका ब्राउज़र प्रोटोकॉल को पहचानता है और उसके अनुसार एक नेटवर्क कनेक्शन बनाता है। यदि प्रोटोकॉल HTTPS है, तो आपका ब्राउज़र एक सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड कनेक्शन बनाने के लिए वेबसाइट के सर्वर से हाथ मिलाता है।
  • दूसरे, आपका ब्राउज़र डोमेन नाम को एक IP एड्रेस में बदलने के लिए एक DNS (Domain Name System) क्वेरी भेजता है। DNS एक विशाल डेटाबेस है, जो डोमेन नाम और IP एड्रेस को मैप करता है।
  • तीसरे, आपका ब्राउज़र वेबसाइट के सर्वर के IP एड्रेस पर एक HTTP रिक्वेस्ट भेजता है, जिसमें पथ, क्वेरी स्ट्रिंग और अन्य हेडर शामिल होते हैं। ये हेडर वेबसाइट को आपके ब्राउज़र के बारे में जानकारी देते हैं, जैसे कि आपकी भाषा, आपका ऑपरेटिंग सिस्टम, आपका स्क्रीन रिज़ॉल्यूशन आदि।
  • चौथे, वेबसाइट का सर्वर आपके ब्राउज़र की रिक्वेस्ट को प्राप्त करता है और उसके अनुसार एक HTTP रिस्पॉन्स तैयार करता है, जिसमें वेब पेज का HTML कोड, स्टेटस कोड, कुकीज़ और अन्य हेडर शामिल होते हैं। ये हेडर आपके ब्राउज़र को वेब पेज को कैसे प्रदर्शित करना है, यह बताते हैं, जैसे कि कैशिंग, रीडायरेक्शन, एन्कोडिंग आदि।
  • पांचवे, आपका ब्राउज़र वेबसाइट के सर्वर से HTTP रिस्पॉन्स प्राप्त करता है और उसका HTML कोड पढ़ता है। फिर आपका ब्राउज़र वेब पेज को रेंडर करने के लिए अन्य संसाधनों को डाउनलोड करता है, जैसे कि CSS, जावास्क्रिप्ट, इमेज, फ़ॉन्ट आदि। इन संसाधनों के लिए भी आपका ब्राउज़र अलग-अलग URL का उपयोग करता है, जो HTML कोड में लिंक होते हैं।
  • छठे, आपका ब्राउज़र वेब पेज को आपके स्क्रीन पर दिखाता है, जिसमें आपको टेक्स्ट, इमेज, वीडियो, बटन, फ़ॉर्म, लिंक आदि दिखाई देते हैं। आप इन विजुअल एलिमेंट्स के साथ इंटरैक्ट कर सकते हैं, जैसे कि किसी लिंक पर क्लिक करना, किसी फ़ॉर्म को भरना, किसी वीडियो को प्ले करना आदि। इन इंटरैक्शन से आपका ब्राउज़र नए URL को लोड कर सकता है, या वेबसाइट के सर्वर से अधिक जानकारी मांग सकता है।

इस प्रकार, URL एक वेब पेज को खोजने और लोड करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, जो आपके ब्राउज़र और वेबसाइट के सर्वर के बीच एक संचार माध्यम के रूप में काम करता है।

URL के विभिन्न घटकों को समझना आपको वेब पेज के बारे में अधिक जानकारी देता है, जैसे कि वेब पेज का नाम, स्थान, प्रकार, विकल्प, भाग आदि।

URL के प्रकार कौन-कौन से हैं?

URL Kya Hai, URL क्या है

URL के विभिन्न प्रकार होते हैं, जो विभिन्न प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाते हैं। कुछ प्रमुख URL के प्रकार निम्नलिखित हैं:

  • Absolute URL – यह एक पूर्ण URL है, जो सभी घटकों को शामिल करता है, जैसे प्रोटोकॉल, डोमेन नाम, पथ, क्वेरी स्ट्रिंग, एंकर आदि। यह URL किसी भी वेब पेज को एक स्पष्ट और अद्वितीय तरीके से पहचानता है। उदाहरण के लिए, https://www.hinditechdaily.com/blog/url-kya-hai?lang=hi#introduction एक एब्सोल्यूट URL है।
  • Relative URL – यह एक आंशिक URL है, जो केवल पथ, क्वेरी स्ट्रिंग, एंकर या उनका कोई संयोजन शामिल करता है। यह URL किसी वेब पेज को उसके वर्तमान स्थान के संदर्भ में पहचानता है। यह URL वेब पेज को लोड करने के लिए अन्य घटकों को छोड़ देता है, जैसे प्रोटोकॉल, डोमेन नाम, पोर्ट नंबर आदि। उदाहरण के लिए, /blog/url-kya-hai?lang=hi#introduction एक रिलेटिव URL है, जो https://www.hinditechdaily.com के साथ जोड़ा जाएगा, जब आप इसे अपने ब्राउज़र में टाइप करेंगे।
  • Root-relative URL – यह एक विशेष प्रकार का रिलेटिव URL है, जो स्लैश (/) से शुरू होता है और वेब पेज को उसके डोमेन के रूट से पहचानता है। यह URL वेब पेज को लोड करने के लिए प्रोटोकॉल और डोमेन नाम को छोड़ देता है, लेकिन पथ, क्वेरी स्ट्रिंग और एंकर को शामिल करता है। उदाहरण के लिए, /blog/url-kya-hai?lang=hi#introduction एक रूट-रिलेटिव URL है, जो https://www.hinditechdaily.com के साथ जोड़ा जाएगा, जब आप इसे अपने ब्राउज़र में टाइप करेंगे।
  • Protocol-relative URL – यह एक और विशेष प्रकार का रिलेटिव URL है, जो डबल स्लैश (//) से शुरू होता है और वेब पेज को उसके प्रोटोकॉल के बिना पहचानता है। यह URL वेब पेज को लोड करने के लिए प्रोटोकॉल को छोड़ देता है, लेकिन डोमेन नाम, पथ, क्वेरी स्ट्रिंग और एंकर को शामिल करता है। यह URL वर्तमान प्रोटोकॉल को स्वचालित रूप से अनुकूलित करता है, जैसे HTTP या HTTPS। उदाहरण के लिए, //www.hinditechdaily.com/blog/url-kya-hai?lang=hi#introduction एक प्रोटोकॉल-रिलेटिव URL है, जो https:// या http:// के साथ जोड़ा जाएगा, जब आप इसे अपने ब्राउज़र में टाइप करेंगे।

URL का उपयोग कैसे करें?

URL क्या है

URL का उपयोग करने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे कि:

  • URL को सही तरीके से लिखें, जिसमें सभी घटकों को उचित रूप से विभाजित और जोड़ा जाए। URL में कोई अतिरिक्त या अनावश्यक स्पेस, सिम्बल, कैपिटल लेटर या अक्षर न हों।
  • URL को सरल और स्पष्ट रखें, जिससे कि आपके ऑडियंस को आपके वेब पेज का उद्देश्य और सामग्री समझने में आसानी हो। URL में अपने वेब पेज के मुख्य कीवर्ड को शामिल करें, जो आपके वेब पेज को SEO (Search Engine Optimization) के लिए बेहतर बनाते हैं।
  • URL को अद्यतन रखें, जिससे कि आपके वेब पेज के कोई बदलाव या सुधार आपके URL में भी प्रतिबिंबित हों। URL को बार-बार न बदलें, जिससे कि आपके वेब पेज के लिंक टूटे या अमान्य न हों।
  • URL को सुरक्षित रखें, जिससे कि आपके वेब पेज की गोपनीयता और अखंडता बनी रहे। URL में कभी भी अपना या अपने ऑडियंस का कोई निजी या संवेदनशील जानकारी न डालें, जैसे पासवर्ड, बैंक डिटेल, आधार नंबर आदि।

URL के फायदे क्या हैं?

URL के उपयोग से आपको कई फायदे होते हैं, जैसे कि:

  • URL आपको वेब पेज को आसानी से खोजने, लोड करने और शेयर करने की सुविधा देता है। आप केवल अपने ब्राउज़र में URL टाइप करके या किसी लिंक पर क्लिक करके किसी भी वेब पेज को देख सकते हैं, या फिर अपने दोस्तों, परिवार, कोलीगों या ग्राहकों के साथ URL को कॉपी या भेज कर उन्हें वेब पेज के बारे में बता सकते हैं।
  • URL आपको वेब पेज के बारे में अधिक जानकारी देता है, जो आपको वेब पेज की सामग्री, प्रकार, विकल्प, भाग आदि को समझने में मदद करता है। आप URL के विभिन्न घटकों को पढ़कर या बदलकर वेब पेज को अपनी जरूरत के अनुसार अनुकूलित कर सकते हैं।
  • URL आपके वेब पेज को SEO के लिए बेहतर बनाता है, जो आपके वेब पेज को गूगल जैसे खोज इंजन में उच्च रैंकिंग प्राप्त करने में मदद करता है। आप अपने URL में अपने वेब पेज के मुख्य कीवर्ड को शामिल करके अपने वेब पेज को अधिक प्रासंगिक और विशिष्ट बना सकते हैं।

URL के नुकसान क्या हैं?

URL के उपयोग से कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जैसे कि:

  • URL को गलत तरीके से लिखने, बदलने या शेयर करने से आपके वेब पेज का लिंक टूट सकता है, या आपके वेब पेज को लोड करने में त्रुटि हो सकती है। आपको अपने URL को सही, सरल और स्पष्ट रखना चाहिए, जिससे कि आपके वेब पेज को आसानी से पहचाना और एक्सेस किया जा सके।
  • URL को असुरक्षित रखने से आपके वेब पेज की गोपनीयता और अखंडता पर खतरा पड़ सकता है। आपको अपने URL में कभी भी अपना या अपने ऑडियंस का कोई निजी या संवेदनशील जानकारी न डालना चाहिए, जैसे पासवर्ड, बैंक डिटेल, आधार नंबर आदि। आपको अपने URL में HTTPS प्रोटोकॉल का उपयोग करना चाहिए, जो आपके वेब पेज को एन्क्रिप्शन और प्रमाणीकरण और प्रतिबंधित करता है।

URL के बारे में निष्कर्ष

इस ब्लॉग पोस्ट में हमने URL के बारे में सब कुछ जाना है। हमने जाना कि URL क्या है और कैसे काम करता है। हमने URL के विभिन्न घटकों, प्रकारों, उपयोगों, फायदों और नुकसानों को समझा है। हमने URL के बारे में कुछ आम प्रश्न और उनके उत्तर भी देखे हैं।

हम आशा करते हैं कि आपको यह ब्लॉग पोस्ट पसंद आया होगा और आपको URL के बारे में अधिक जानकारी मिली होगी। अगर आपके पास URL के बारे में कोई सवाल या सुझाव है, तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। हम आपके सवालों का जवाब देने की कोशिश करेंगे।

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